वंदे भारत और बेघर भारत

वंदे भारत और बेघर भारत

वंदे भारत और बेघर भारत

यू तो बीमारी धर्म, जात, अमीरी, गरीबी नहीं देखती परंतु आज इस चाइनीज वायरस का सब से ज्यादा दर्द कोई झेल रहा है तो सिर्फ गरीब। वो गरीब मजदूर जिस ने हमारे शहरों को बसाने मे अपना खुन पसीना लगाया आज वही सडकों पर लाचार, बेबस पैदल ही अपने घर लौट जाना चाहता है। घर का मतलब तो आप समझते ही होंगे, जहाँ पर रात के अंधेरे से पहले पहुंच जाना चाहते हैं। वहीं घर जहां आप अपने आप को सब से ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं, अपनो के साथ रहते हैं। आप और हम अपने घरों में आज बैठ tv, phone, Internet का इस्तेमाल कर रहे हैं, हम में से बहुत से लोग lockdown में अपनी Selfy social media पर upload कर रहे हैं। एक घर लाचार, बेबस मजदूरों का भी है उन का यह घर दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों से हजारों किलोमीटर दूर किसी छोटे से गांव, कस्बे में है। जहां आज ये मजदूर जाना चाहते हैं। इन मजदूरों का दोष केवल इतना ही है कि यह गरीब है जिस का आज ये लोग सजा भुगत रहे हैं। इन के पास यदि पैसे होते, अमीर होते, तो इन के लिए भी शायद कोई वंदे भारत जरूर चलाया जाता। हर समाज में दो वर्ग है जिस में एक वर्ग के लिए वंदे भारत जैसी योजनाएं होती है और दूसरे समाज के लिए बेघर भारत के अलावा कुछ नहीं मिलता । जब कभी भी आप और हम इतिहास के पन्ने पलटते है तो हमेशा यही देखने को मिलता है कि गरीब वर्ग की जान बहुत सस्ती रही है। आज भी यही स्थिति है गरीब केवल वोट के काम आता है उस के बाद उन्हें उन के हालात पर छोड़ दिया जाता है।

ऊपर के तस्वीर में आप दोनो फ्रेम में इंसान ही देख रहे हैं लेकिन दोनो में फर्क है और यह फर्क अमीरी और गरीबी का है। एक फ्रेम में वो वर्ग है जिस के आस पैसा है, अमीर है विदेशों में रहता है, पढा – लिखा है। किसी ना किसी उच्चे पद पर या कोई उच्च आमदनी वाला काम करता है। दूसरे फ्रेम में वो वर्ग है जो आप के और हमारे घरो को बनाता है, शहरों को बनाता है, बड़े – बड़े कारखानों में काम करता है लेकिन वो अपने काम से इतना नहीं कमा पाता कि उस वर्ग के बराबर आ सके जो अमीर है। इसी अमीरी और गरीबी का परिणाम है कि एक वर्ग को सुरक्षित विदेशों से भारत लाने के लिए हवाई जहाज और नौसेना के जहाजों का प्रयोग किया जा रहा है और उन भारतीयों को सुरक्षित अपने देश लाया जा रहा है। ऐसा कर के भारतीयों को गर्व का अनुभव हो रहा है और होना भी चाहिए अपने देश के लोगों की जान को बचाना, हजारो किलोमीटर दूर से अपने घर लाना गर्व करने योग्य भी है परंतु यहा एक शर्म का विषय भी है। शर्म इस बात की हम विदेशों में फंसे भारतीयों को तो सुरक्षित ला पा रहे हैं परंतु हमारे अपने देश में ही एक शहर से दूसरे दूसरे शहर में ला पाने में असमर्थ हैं। लाखो लोग अपने घरों के लिए पैदल निकल चुके हैं, कुछ अपने घर को पहुंचने मे सफलता प्राप्त कर रहे हैं कुछ रास्ते में ही दम तोड़ दे रहे हैं। यह भी इंसान ही है में इस पोस्ट के माध्यम से सरकारों से कुछ सवाल पूछना चाहता हूं, मेरे यह सवाल हो सकता है आप मे मन में भी आते हो।

– क्या केन्द्र सरकार केवल उन भारतीयों के लिए जो दूर विदेशों में फंसे हैं? उन वास्तविक भारतीयों का क्या जो भारत को ही अपनी कर्मभूमि मानते हैं। वास्तविक भारतीय इन मजदूरों को इसीलिए कह रहा हूँ क्योंकि इन के लिए कर्मभूमि भारत हैं कोई अन्य विकसित देश नहीं। इन मजदूरों ने जन्म भी यहीं लिया है और यह मरना भी यही चाहते हैं। कोइ वंदे भारत मिशन इन बेघर भारत के लिए भी चलाई।

– क्या यह लाचार, सिर्फ आप के वोट है इस के अलावा इन कि कोई किमत नहीं है? सभी राज्य सरकारों को शर्म आनी चाहिए जो अपने राज्यवासीयो को अपने राज्य नहीं ला पा रहे।

– मुख्य तौर पर ये मजदूर दिल्ली, मुंबई, राजस्थान में फंसे हैं और अपने अपने घरों को लौट जाना चाहते हैं। शर्म आनी चाहिए इन राज्य सरकारों और इन के मुख्यमंत्रियों को। आज कहा है वो केजरीवाल जो ये कहते समय गर्व आ अनुभव कर रहे थे कि एक बिहारी 500 रू लेकर दिल्ली आता है और 5 लाख का इलाज मुफ्त करवा लेता है। आज वही बिहारी इस नरख नगरी दिल्ली को छोड़कर जाना चाहता है। बिहारी आप को 500 रू और देने को तैयार है बह वह अपने घर लौट जाना चाहता है।

– तीन – तीन राजनीतिक पार्टियों से मिल कर बनी मुंबई सरकार लोगों को सुरक्षित घर पहुंचे में असमर्थ क्यों है? मुम्बई सरकार का सालाना बजट कई राज्यों से दो गुना से भी ज्यादा है फिर भी लोग भूख से मर रहे हैं। जिस – बिहारी और उत्तरी प्रदेश के निवासियों को आप मुम्बई से कभी भगाना चाहते थे आज वो खुद आप का शहर छोड़ कर जाना चाहता है उन्हें जाने दे, उन्हें सुरक्षित घर पहुंचे की सरकार व्यवस्था कर दे यकीन मानिए आप के बड़े शहरों कि तरफ अब ये मजदूर देखना भी पसंद नहीं करेंगे।

– राजस्थान में उस पार्टी की सरकार है जिस को केन्द्र सरकार की किसी भी कार्य और नीतियों मे कमियों के अलावा कुछ नहीं दिखता। राजस्थान में फंसे लोगों को उन को अपने घर नहीं पहुंचा पा रहा है। देश को किस प्रकार चलाना है कि नसीहत केन्द्र को देने वाली कांग्रेस सरकार आज अपने राज्य में फंसे प्रवासी भारतीयों को अपने घर नहीं पहुंचा पा रही।

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