BHIC 131 Solved Assignment 2020

BHIC 131 Solved Assignment 2020

BHIC 131 Solved Assignment 2020

History of India From the Earliest time upto 300 CE
भारत का इतिहास (प्रारंभ से 300 ई. तक)

2019-2020 pdf in Hindi / English Medium
31 April  2020 / 30 September 2020

For Handwritten, Pdf Solved
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Title – BHIC 131 History of India From the Earliest time upto 300 CE

भारत का इतिहास (प्रारंभ से 300 ई. तक)

University – Ignou

Assignment Types – PDF, SOFT COPY /Handwritten on order

Course – 

Medium / Language – HINDI MEDIUM / ENGLISH MEDIUM BOTH AVAILABLE

Session – JULY 2019, JANUARY 2020

Subjects code – BHIC 131 

Assignment Submission Date – July 2019 session के लिए – 30 April 2020, January 2020 session के लिए – 30 September 2020.

History of India From the Earliest time upto 300 CE
भारत का इतिहास (प्रारंभ से 300 ई. तक)

BHIC 131 Solved Assignment 2020 hindi medium 

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प्रश्न 3 हड़प्पावासियों के धर्म और धार्मिक व्यवहारों के स्वरूप की चर्चा कीजिए।

उत्तर –

धर्म एवं धार्मिक रतियां

पूजा स्थल – मोहनजोदड़ो में कई बड़े भवनों को मंदिरों के रूप में देखा गया है, क्योंकि अधिकतर पत्थर की मूर्तियां, जिसमें मात्देवी की काफी मूर्तियां हैं, इन्हीं भावनों से प्राप्त हुई हैं। मोहनजोदड़ो में निचले नगर में कई एक वृहद इमारत मिली है। इनमें एक मंच है, जिस पर एक पाषाण शिल्पकृति प्राप्त हुई है। इस इमारत में एक और मूर्ति मिली है। इसी कारण इस इमारत को विद्वानों ने मंदिर माना है। मोहनजोदड़ो से प्राप्त विशाल स्नानागार को धार्मिक क्रियाकलापों से जोड़ा जाता है। कुछ भी हो यह तो निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि वर्तमान मंदिर की तरह कोई संरचना नहीं मिली है।

आराध्य – इस बारे में जानकारी मृणमूर्तियों से मिलती है। इस मूर्तियों में सबसे प्रसिद्ध है,आदि शिव की मूर्ति, जो योगी की मुद्रा में बैठा है। वह देवता, बकरी, हाथी शेर तथा हिरण से घिरा हुआ है। मार्शल ने इसे पशुपति माना है। एक स्त्री मूर्ति के गर्व से एक पौधा निकलता हुआ प्राप्त हुआ है, शायद या उर्वरता की देवी थी। एक देवता जिसके सिर पर सींग और लंबे बाल हैं, वह पीपल की शाखाओं के बीच खड़ा है। एक उपासक उसके सामने झुका हुआ है। प्रमाणों से पता चलता है कि सारे स्थलों पर शिव की मूर्ति पूजा होती है।

मातृदेवी – हड़प्पा स्थानों से प्राप्त मृणमूर्तियों में सबसे अधिक संख्या स्त्री मूर्तियों की है। इन्हें मातृदेवी माना गया है। कभी-कभी उनमें एक शिशु भी दिखाए गए हैं। इन मूर्तियों से गर्भधारण के साक्ष्य भी मिले हैं।

वृक्ष आत्माएं – हड़प्पा सभ्यता के लोग प्रकृति की पूजा करते थे। इसी संदर्भ में वृक्षों की पूजा करते थे। पूजा किए जाने वाले वृक्षों में पीपल, नीम प्रमुख थे। वृक्षों की शाखाओं के बीच से झांकती हुई मूर्तियां इस तथ्य की ओर संकेत करती है कि उनका विश्वास था कि वृक्षों में आत्मा का निवास होता है।

कुछ पौराणिक नायक – कुछ ऐसी आकृतियां प्राप्त हुई हैं, जिनका धर्मिक महत्त्व हो सकता है, जो मुहरों पर पाई गई हैं। दो शेरों से लड़ता हुआ एक पुरुष उस तथ्य की ओर इशारा करता है, जब प्रसिद्ध योद्धा गिलगणेश दो शेरों को मारता है।

जानवरों की पूजा – लोग कई प्रकार के जानवरों की पूजा करते थे, मृणमूर्तियों से इस तथ्य की पुष्टि होती है। चन्हुदड़ो से एक मूर्ति मिली है, जिसमें सांड का स्त्री की झुकी हुई आकृति के साथ संभोग करते हुए दिखाया गया है।

मिथकीय जानवर – ऐसी भी मुहरें प्राप्त हुई हैं, जिन पर विभिन्न स्वरूप वाले जानवरों को दिखाया गया है। एक ऐसा जानवर मिला है, जिसका अगला हिस्सा मनुष्य का था तथा पिछला हिस्सा शेर का है। इसी प्रकार भेड़ो, बेलो तथा हाथियों की मिली जुली आकृतियां भी मिली है।

मृतकों का अंतिम संस्कार – हड़प्पा सभ्यता से ऐसा कोई स्मारक प्राप्त नहीं हुआ है, जैसा कि मिस्र में प्राप्त होता है। मिस्र में मृतकों के लिए पिरामिड बनाया जाता था। फिर भी हड़प्पा सभ्यता के लोगों में प्रचलित अंतिम संस्कार के कुछ जानकारियां मिलती है। हड़प्पा में कई कब्रे मिली है। शव को सामान्य तौर पर उत्तर दक्षिण दिशा में रखकर दफनाया जाता था। कब्रों से कई प्रकार के मिट्टी के बर्तन प्राप्त हुए हैं। हड़प्पा की एक कब्र में ताबूत भी प्राप्त हुआ है। कालीबंगा में शवाधान की अलग रतियां प्रचलित थी। यहां छोटे-छोटे वृत्ताकार गड्ढे प्राप्त हुए हैं। इनमें राजधानियां तथा मिट्टी के बर्तन प्राप्त हुए हैं। किंतु यहां कंकालो के अवशेष नहीं मिले हैं। ऐसे गड्ढे भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें हड्डियां एकत्रित मिली है। लोथल से एक युग्म शवाधान मिला है, जिसमें एक स्त्री और एक पुरुष को साथ ही दफनाया गया था। मृतकों के साथ कब्र में आवश्यक वस्तुओं को रखना इस बात का घोतक है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग मरणोपरांत जीवन में विश्वास करते थे। उपयुक्त तथ्यों से यह सिद्ध होता है कि अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग संस्कार की विधियां प्रचलित थी।

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