Concept of Democracy

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Concept of democracy (लोकतंत्र की अवधारणा) 

Democracy का संकल्पनात्मक परिवार –  स्वायत्तता, अधिकार, समानता और स्वतंत्रत

Democracy की अवधारणा के सीमाक्षेत्र के भीतर अधिकार, स्वतंत्रता, समानता आदि संकल्पाएँ आती हैं।

Autonomy –  मनुष्य का एक स्वतंत्र अस्तित्व हैं। वह बौद्धिक प्राणी है अतः एवं क्या उचित या अच्छा है और क्या अनुचित या बुरा – यह वह स्वयं निर्धारित कर सकता है। स्वायत्तता का principle उस मूल्य का ही विवेचन करता है, जो हमें अपने विशिष्ट व्यक्तियों, निजी निर्णयों तथा जीवन – विकल्पों पर नियंत्रण रखने से संबंधित हैं। जिस प्रकार व्यक्ति अपने जीवन व अनेक व्यक्तिगत मामलों में निजी जीवन में स्वयं निर्णय लेता है, उसी प्रकार association के सदस्यों के रूप में भी निर्णयों में भाग लेने का उसका बराबर का अधिकार हैं, because वह इनमें लिए जाने वाले निर्णय लेता है, उसी प्रकार संघों के सदस्यों के रूप में भी निर्णय व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं।

Liberty – लोकतंत्र में  liberal सिद्धांत का आधार उदारवादी राजनीतिक सिद्धांत में स्वायत्तता, स्वतंत्रता एवं समानता हैं। जाॅन लाॅक के अनुसार सरकार को व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता एवं संपत्ति को अन्य व्यक्तियों या State द्वारा क्षति पहुँचाए जाने से रक्षा करनी है। इस प्रकार govt को व्यक्ति के अधिकारों की तथा उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देनी चाहिए। लाॅक के अनुसार मनुष्य होने के कारण सभी समान हैं।

Equality – प्रत्येक व्यक्ति समान रुप में मानव है, किन्तु उसके व्यक्तिगत विचार, पसंद, नापसंद एक – दूसरे से अलग हो सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक निर्णय लेने में समानता कैसे आ सकती है? लोकतांत्रिक सिद्धांतवादी इस आधार पर equality के दो भेद करते हैं – (1) प्रत्यक्ष समानता, (2) परोक्ष समानता।

(1) प्रत्यक्ष समानता – जब प्रत्येक नागरिक किसी democratic process के परिणाम को समान रूप से प्रभावित करता है।

(2) परोक्ष समानता – जब हम यह कह सकते हैं कि अमुक decision सभी ने समान रूप से लिया, जबकि निर्णय पहले ही लिया जा चुका है।

व्यक्तिगत रूप से अलग – अलग होने के कारण व्यक्ति कोई भी निर्णय निर्विरोध कम ही ले पाते हैं। ऐसी स्थिति में Democracy की मर्यादा को बनाए रखते हुए बहुमत द्वारा निर्णय लेना ही सर्वोचित प्रक्रिया है, because प्रत्येक व्यक्ति को निर्णय की। समान opportunity मिलता है। इस लिहाज से यह प्रत्यक्ष समानता की शर्त पूरी करती है। साथ ही परोक्ष समानता के रूप में भी सर्वोत्तम है, because सभी की अपेक्षा अधिकतर लोगों ने decision लिया, जो सर्वमान्य हुआ।

यदि Freedom के सिद्धांत को ही प्रधानता दी जाए, तो व्यक्ति की व्यक्तिगत Liberty एवं Rights अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इस आधार पर अपेक्षा रहेगी कि राज्य को समाज में सीमित भूमिका निभाते हुए हम पर उतम जीवन या सम्पूर्ण society का दृष्टिकोण नहीं थोपना चाहिए। राज्य को कुछ विभिन्न नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए, उन्हें नि :शुल्क जन – सेवाएँ दिलवाने के लिए अपने सम्पन्न नागरिकों पर Tex नहीं लगाना चाहिए। यह विधि – विरूद्ध और अन्यायपूर्ण होगा।

in fact यदि व्यक्ति में अपनी जीवन – योजनाओं को निर्धारित करने की क्षमता नहीं है, तो औपचारिक, राजनीतिक समानता का उपयोग कम होगा।

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