Frankfurt School Theory 

Frankfurt School Theory, frankfurt School,

Frankfurt School Theory
फ्रैंकफर्ट स्कूल

 

Frankfurt School फ्रैंकफर्ट एक संस्थान का नाम है, यह जर्मनी में हैं और सन 1920 तथा 1930 के समय विचारकों के एक समूह द्वारा सामाजिक अनुसंधान का कार्य किया जा रहा था। विद्वानों के इस ग्रुप को Frankfurt School कहते है। फ्रैंकफर्ट स्कूल के विद्वान थे – हाॅर्कहाइमर, अडौरनो, पोलाॅ, एरिक फ्रेम,  न्यूमान तथा हरबर्ट मारक्यूज़।

अनुसंधान कार्य कर रहे विद्वान मार्क्सवाद से संबंधित थे। अगर हम बात करे  मार्क्स, लेनिन और माओ की तो इन्होंने मार्क्सवादी सिद्धांत और क्रांतिकारी व्यवहार – व्यवस्था में अपना योगदान दिया। इस के साथ 3 और Groups है जिस के द्वारा मार्क्सवादी Theory को और अधिक मजबूत और सम्पन्न बनाया तथा मार्क्सवाद में बदलाव भी किया।
मार्क्सवादी सिद्धांत में बदबद  कर के मार्क्सवाद में Conservatism विचार को हटाया।
ये तीन धाराएं है – (1) हंगरी निवासी लुकाक्स(Lukacs)  (2) इटली निवासी ग्रामस्की(Gramsci)  और (3) जर्मन फैंकफर्ट स्कूल(Frankfurt School) । आज हम एक धारा जर्मन फैंकफर्ट स्कूल को पढ़ेंगे।

हाॅर्कहाइमर, अडौरनो, पोलाॅक, एरिक फ्रौम, न्यूमान तथा हरबर्ट मारक्यूज़ इन सभी विचारकों ने मार्क्सवादी सिद्धांत के अनेक मुद्दों पर अपने विचार दिए और इस सिद्धांत में अपना योगदान दिया। कुछ विषयों पर इनके विचार समान थे, तो कुछ पर अलग भी थे। सब के विचारों को एक रूप में आलोचकीय सिद्धांत भी कहा जाता है। फ्रैंकफर्ट स्कूल के सभी विचारक स्टालिनवादी समाजवाद के आलोचक थे। वे समाज में प्रभुत्व के खिलाफ थे। समाज में होने वाले किसी भी प्रकार के शोषण का वे विरोध करते थे। वे राजनीतिक व आर्थिक विषय से अधिक Importance सांस्कृतिक तथा वैचारिक विषय को देते थे।

सभी प्रकार के प्रभुत्व का विरोध

Frankfurt School फ्रैंकफर्ट स्कूल के विचारक जब लेखन कार्य कर रहे थे उस समय जर्मनी में नाजीवाद तथा इटली में फासीवाद था। सोवियत संघ में स्टालिनवाद सर्वसतावाद का रूप ले चुका था। साम्यवादी आन्दोलन पश्चिमी यूरोप में फेल हो गया था। उस समय विद्वान इस प्रकार के Atmosphere में लिख रहे थे। इस लिए वह अलग – अलग विचारधाराओं एवं उनके परिणामों से वाकिफ़  थे। वास्तविकता का सही ब्यौरा न मिलने के कारण इन विचारकों ने सभी प्रकार की विचारधाराओं की आलोचना की।

मुख्य तौर पर वे अलगाव की व्यवस्थाओं और शोषण को न दिखान वाली या उन्हें सही साबित करने वाली विचारधाराओं का ज्यादा आलोचना किया। इस आलोचना वाले अध्ययन के द्वारा अलग – अलग  विचारधाराओं में प्रभुत्व की जड़ों तक पहुँचना चाहते थे। इस तरह उन्होंने Reality को पहचान कर लोगों को Revolt के लिए तैयार किया। लोगों में सही जानकारी लाने का प्रयास किया। उनका मकसद भी समाज में Marx के द्वारा परिवर्तन लाना था। जो लोग यह मानते थे कि इंसान भगवान के द्वारा हि असमान हैं और असमानताएँ लोगों द्वारा नहीं है उन के इस विचार को भी आलोचना सहना पड़ा।

रूढ़िग्रस्त मार्क्सवाद का विरोध

 सोवियत संघ में कुछ मार्क्सवादी सतावादी तत्व प्राप्त कर चुकी थी। ये रूढ़िग्रस्त Marxist दमनकारी थी, जिनका विरोध एवं आलोचना Frankfurt School के विद्वानों ने की। उन्होंने मार्क्सवाद को कुछ हद तक रूढ़िवादी माना क्योंकि मार्क्सवाद सारी ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या आर्थिक आधारों पर की। यद्यपि समाज में उत्पादीय संबंधों में प्रतिरोध होते हैं, किंतु यह आवश्यक नहीं है कि वे सब एक ही तरह के होते हैं। उत्पादीय शक्तियों के विरोधाभास के परिणाम भी हर समाज में हर स्थिति में एक समान नहीं होते।

इनकी असमानता का कारण लोगों के विभिन्न दृष्टिकोण हैं। लोग इन विरोधाभासों को किस प्रकार देखते हैं, यह उनके परिणामों को निर्धारित करता है, जबकि रूढ़िग्रस्त मार्क्सवाद के मतानुसार सभी उत्पादकीय शक्तियों तथा संबंधों के टकराव के परिणाम एक ही तरह के होते हैं। Frankfurt School के विद्वानों का कहना है कि किसी ऐतिहासिक परिस्थिति को सामाजिक – आर्थिक अधिरचना एवं सामाजिक व्यवहारों में आपसी क्रियाओं द्वारा समझना चाहिए।

Frankfurt School के विद्वानों ने अपने लेख प्रभुसत्ता और सता पर लिखा। विद्वानों ने यह बताया कि Socialist और Liberlist समाजों में प्रभुत्व व सता को विवेक के आधार पर सही बताया जाता है। उन्होंने कहा कि समाज का अध्ययन लोगों पर नियंत्रण करने के लिए नहीं बल्कि मानवीय विज्ञानों में समाज का अध्ययन लोगों को सभी प्रकार के बंधनों से बंधनमुक्त करने के लिए किया जाता है। किसी भी समाज में जो भी प्रयोग किए जाते हैं, उनका मुख्य उद्देश्य प्रभुत्व की व्यवस्था का औचित्य सिद्ध करना होता है।

Frankfurt School को जवाबी Culture के नाम से भी जाना जाता है। ये विद्वान शिक्षा, सामाजिक प्रक्रियाओं, सतावादी परिवारिक संगठन इन सभी को गलत मानते हैं। वे sexual Freedom के समर्थक हैं। वे ऐसे Political Parties की निन्दा करते हैं जो आम लोगों के मत को फेर – बदल करने वाले है।

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