George Lukacs | George lukacs on marxism

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जाॅर्ज लुकाक्स George Lukacs (1885-1971)

 

George Lukacs का जन्म हंगरी के बुडापेस्ट में 15 अप्रैल, 1885 को हुआ था। उन्होंने बुडापेस्ट विश्वविद्यालय से स्नातक होकर बर्लिन तथा हेडलबर्ग विश्वविद्यालयों में अध्ययन किया। जाॅर्ज लुकाक्स की आरंभ से ही साहित्यिक अभिरूचि थी। अध्ययन करते हुए भी वे साहित्यिक आलोचना करते रहते थे। उनकी कुछ रचनाएँ – सोल एण्ड फार्म. (1910), हिस्ट्री आफ डवलपमेंट आफ माॅडर्न ड्रामा. (1911)), ऐस्थैटिक कल्चर. (1913) तथा थ्योरी आफ नाॅवल. (1916)हैं। आरंभ में लुकाक्स पर प्लेटो व हीगलवादी के विचारों का काफी प्रभाव था।

वे उनकी भांति नैतिक आदर्शवाद की ओर आकर्षित थे। परन्तु बाद में मार्क्सवाद ने उन्हें प्रभावित किया और वे हंगरी के साम्यवादी दल के सदस्य बनकर साम्यवादी आंदोलन से जुड़ गए। वे 1919 में साम्यवादी सरकार में शिक्षा मंत्री बने। जब हंगरी में साम्यवादी शासन का पतन हो गया, तब नई सरकार बनी।

हंगरी की new government ने लुकाक्स पर मुकदमा चलाया और उन्हें मृत्युदण्ड की घोषणा की। इस पर वे हंगरी छोड़कर भाग आए और Astria, Germany तथा Soviet Union में अगले बीस वर्ष तक रहे। उन्होंने आॅस्ट्रिया में रहते हुए ‘हिस्ट्री एण्ड क्लास काॅशसनैस’  लिखी, जिसने बड़ी संख्या में मार्क्सवादियों का ध्यान आकर्षित किया और उन्हें प्रभावित किया। 1945 में वे हंगरी लौट आए और बुडापेस्ट विश्वविद्यालय में एस्थैटिक्स के प्रोफेसर के रूप में अध्यापन किया। इस दौरान वे राजनीति में सक्रियता से भाग लेने लगे।

1956 में वे हंगरी में इमरे की साम्यवादी सरकार में संस्कृति विभाग के मंत्री बने। कुछ महीने उन्होंने इस पद पर कार्य किया। इसके पश्चात इस सरकार का पतन हो गया। फिर उन्हें रूमानिया निर्वासित कर दिया गया। 1957 में लुकाक्स  पुनः हंगरी लौट के अंतिम चरण में भी वे दार्शनिक व साहित्यिक रचनाएँ लिखते रहें। 4 जून, 1971 को लुकाक्स का निधन हो गया।

द्वंद्वात्मक भौतिकवाद का खंडन

द्वंद्वात्मक भौतिकवाद का खंडन – Marx ने कहा था कि पूँजीपति व सर्वहारा वर्ग में संघर्ष होगा। फिर पूँजीवाद में विरोधाभास पनपेंगे, तब सर्वहारा क्रांति द्वारा पूँजीवाद का उन्मूलन कर देगा। लेकिन marx का यह कथन सत्य साबित नहीं हुआ। पूँजीवाद समाप्त नहीं हुआ, वरन् अनेकों संकटों के साथ बढ़ता रहा।

‘पूँजीवादी का अन्त क्यों नहीं हुआ’ इस विषय में लेनिन ने बताया कि capitalism का अंत न होने का कारण यह है कि पूंजीवाद उच्चतम चरण तक पहुँचकर साम्राज्यवाद की ओर चला गया और वह उसकी अंतिम पहुँच थी।

George Lukacs  के तर्क अनुसार केवल सर्वहारा ही capitalism का अंत करने के लिए पर्याप्त नहीं है। सर्वहारा के अस्तित्व के साथ उसमें क्रांतिकारी चेतना का होना बहुत आवश्यक है। वे marxism को अन्य भौतिक विज्ञानों के जैसा विज्ञान नहीं मानते थे।

George Lukacs एंजेल्स द्वारा human behavior के विषय में विचार पर भी असहमत थे। वे यह नहीं मानते थे कि Human Behaviour द्वंद्वात्मक कानूनों द्वारा संचालित होता है। उनके विचार में विचार भौतिक  संसार का दर्पन नहीं होते। लुकाक्स शासकों की भौतिक शक्तियों की अपेक्षा चेतना की भूमिका को अधिक प्रधानता देते हैं।

 Georg Lukacs ने marxism का संशोधन किया और कहा कि भौतिक परिस्थितियाँ इतिहास को नहीं बदल सकतीं। उन्होंने मार्क्सवाद के प्रमुख आधार ऐतिहासिक भौतिकवाद का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक क्रांति capitalism में विरोधाभास की तीव्रता का फल नहीं होती। जब एक वर्ग विरोधाभास के बारे में सचेत हो जाता है, तब सामाजिक क्रांति होती है। अतः उन्होंने मानवीय चेतना की रचनात्मकता पर बल दिया।

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Marx के अनुसार जब उत्पादन की शक्तियों एवं उत्पाकीय संबंधों में विरोधाभास तीव्र हो जाते हैं, तब समाज में परिवर्तन होते हैं। लुकाक्स इसके विपरीत कहते हैं कि उत्पादन के साधनों एवं संबंधों में विरोधाभास होने मात्र से Society में परिवर्तन नहीं आते, जब तक कि सर्वहारा वर्ग रूपी एक मानवीय पात्र इस विरोधाभास को समझ नहीं लेता।

तात्पर्य यह है कि मस्तिष्क पहले है पदार्थ बाद में। केवल सर्वहारा का शोषण तथा उसका अलगाव होना revolution लाने के लिए पर्याप्त नहीं है। क्रांति लाने के लिए necessary है कि सर्वहारा वर्ग शोषण व अलगाव के प्रति सचेत हो। वह जानता है कि उसका exploitation हो रहा है, तभी वह उसका विरोध कर पाएगा। यह लगभग अर्द्ध – higlwadi सोच थी, जिसके अनुसार सचेतन पहले व पदार्थ बाद में आता है।,

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