MHD 04 Solved Assignment 2020-21

MHD 04 Solved Assignment 2020-21

MHD 04 Solved Assignment नाटक और अन्य गद्य विधाएं

MHD 04 : नाटक और अन्य गद्य विधाएं

Solved Assignment

July 2020 and January 2021 

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Title – MHD 04 नाटक और अन्य गद्य विधाएं

University – Ignou

Assignment Types – PDF, SOFT COPY /Handwritten on order

Course – Master of Arts Hindi (MHD)

Medium / Language – HINDI

Session – JULY 2020, JANUARY 2021

Subjects code – MHD 04

Assignment Submission Date – July 2020 session के लिए – 31 March 2021, January 2021 session के लिए – 30 September 2021.

(MHD) Master of Arts Hindi

MHD 4 Solved Assignment 2020-21

 

प्रश्न 1. निम्नलिखित अवतरणों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।
(क) समष्टि में ही व्यष्टि रहती है। व्यक्तियों से ही जाति बनती है। विश्व, प्रेम, सर्वभूत – हित – कामना परम धर्म है, परंतु इसका अर्थ यह नहीं हो सकता कि अपने पर प्रेम न हो,इस अपने ने क्या अन्याय किया है जो इसका बहिष्कार हो?

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उत्तर –
संदर्भ – प्रस्तुत – अवतरण जयशंकर प्रसाद रचित नाटक ‘स्कंदगुप्त’ के द्वितीय अंक से उद्धृत है । यह संवाद देवसेना और जयमाला के बीच अवंती दुर्ग में हो रहा है। देवसेना देश और मातृभूमि के लिए व्यक्तिगत हितों और सर्वस्व न्योछावर करने को महान कार्य और देशभक्ति बताती है, तब जयमाला उसे व्यक्ति (व्यष्टि) के अस्तित्व के महत्व को समझाते हुए कहती है कि

व्याख्या – व्यष्टि संसार का अर्थात समिति का एक अंश है, किंतु रहता तो वह समझती में ही है । व्यक्ति से जाति, जाति से समाज, समाज से देश और देश से विश्व बनता है‌। विश्व के सभी प्राणियों से प्रेम करना, सबके हित की कामना करना सबसे बड़ा धर्म है, परंतु इसका अर्थ यह तो नहीं कि व्यक्ति स्वयं के अस्तित्व को ही समाप्त कर दें । अपने परिवार और स्वयं से प्रेम ना करें। देशहित सर्वोपरि है, परंतु इसके लिए अपने से प्रेम करने वाले अपने से जुड़े लोगों का बहिष्कार उचित नहीं है।

विशेष – 1. तत्समनिष्ठ भावपूर्ण व अर्थवान भाषा है।
2. संवाद अर्थपूर्ण, संक्षिप्त एवं सहज बोधगम्य है।
3. देशहित और विश्व- प्रेम की सर्वोच्च सिद्ध करते हुए व्यक्ति के महत्व को दर्शाया गया है।

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(ख) पता नहीं प्रभु है या नहीं
किंतु उस दिन यह सिद्ध हुआ
जब कोई भी मनुष्य
अनासक्त होकर चुनौती देता है इतिहास को
उस दिन नक्षत्रों की दिशा बदल जाती है।
नियति नहीं पूर्व – निर्धारित
उसको हर क्षण मानव निर्णय बनाता – मिटाता है।

MHD 4 Solved Assignment 2021

उत्तर – संदर्भ – प्रस्तुत अवतरण धर्मवीर भारती के गीतिनाटय ‘अंधायुग’ से लिया गया है। युद्ध के अठारहवें दिन धृतराष्ट्र, गांधारी और विदुर युद्ध की स्थिति पर चर्चा कर रहें हैं। कुछ याचक के आने पर धृतराष्ट्र को लगता है कि संजय आ गया। तब एक याचक कहता है कि मैं वह भविष्य हूं, जो आज झूठा सिद्ध हुआ। ईश्वर ही सत्य है और वह है कृष्ण। इस पर गांधारी कहती हैं कि वह प्रभु नहीं है।
उसी के कारण यह विनाश हुआ है। इस पर याचक कहता है कि

MHD 04 Solved Assignment 2020-21

व्याख्या – यह तो मैं नहीं जानता कि प्रभु है या नहीं, किन्तु जब युद्ध प्रारंभ हुआ और कृष्ण ने अर्जुन को अनासक्त होकर युद्ध करने का उपदेश दिया, तब समझ आया कि जब कोई मनुष्य अनासाक्त होकर, मोह – माया छोड़कर संसार को और इतिहास को चुनौती देता है, तो संसार का नियमित चक्र भी बदल जाता है। ग्रह – नक्षत्रों की दिशा भी बदल सकती है। जिसे अटल सत्य माना जाता है, वह भी मिथ्या सिद्ध हो सकता है। संसार जिसे नियति कहता है, वह हर क्षण मनुष्य के पौरुष और निश्चिय से पल – पल बदलती रहती है।

MHD 04 Solved Assignment 2021

विशेष – 1. संवाद संक्षिप्त, भावपूर्ण एवं गहन अर्थ – व्यंजना लिए हुए हैं।
2. भाषा तत्सम प्रधान संस्कृतिनिष्ठि एवं गीतात्मक है।
3. मनुष्य दृढ़ निश्चय से असंभव को भी संभव कर सकता है, का भाव द्रष्टव्य है।

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