MHD 05 Solved Assignment 2020-21

MHD 05 Solved Assignment 2020-21

MHD 05 Solved Assignment साहित्य सिद्धांत और समालोचना

MHD 05 : साहित्य सिद्धांत और समालोचना

Solved Assignment

July 2020 and January 2021 

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Title – MHD 05 साहित्य सिद्धांत और समालोचना

University – Ignou

Assignment Types – PDF, SOFT COPY /Handwritten on order

Course – Master of Arts Hindi (MHD)

Medium / Language – HINDI

Session – JULY 2020, JANUARY 2021

Subjects code – MHD 05

Assignment Submission Date – July 2020 session के लिए – 31 March 2021, January 2021 session के लिए – 30 September 2021.

(MHD) Master of Arts Hindi

MHD 5 Solved Assignment 2020-21

प्रश्न 3. ध्वनि संप्रदाय की स्थापना ऊपर विचार कीजिए।
उत्तर – आनन्दवर्धन को ध्वनि नामक काव्यतत्व के प्रवर्तक होने का श्रेय दिया जाता है।

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ध्वनि का स्वरुप – आनन्दवर्धन ने ध्वनि का स्वरुप इस प्रकार किया है – ‘जहां’ (वाच्य)अर्थ और (वाचक) शब्द अपने – अपने अस्तित्व को गौण बना कर जिस (विशिष्ट) अर्थ को प्रकट करते हैं, वह (अर्थ) ध्वनि कहलाता है।
आनन्दवर्धन ने ध्वनि के स्वरूप को समझाने के लिए कतिपय उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। उनका कथन है – जिस प्रकार किसी अंगना के सुन्दर अवयव और उनसे फूटता हुआ लावण्य भिन्न – भिन्न पदार्थ है, उसी प्रकार महाकवियों की वाणी में प्रसिद्ध अवयव (अर्थात्, वाचक शब्द और वाच्य अर्थ) और उनसे अभिव्यक्ति प्रतीयमान अर्थ भी भिन्न- भिन्न है।

MHD 05 Solved Assignment 2020-21

इस कथन का निष्कर्ष यह है कि
* ध्वनि (व्यंग्यार्थ) शब्दार्थ से विभिन्न तत्व है।
* ध्वनि लावण्य , लज्जा आदि के समान एक आंतरिक तत्व है।
* शब्दार्थ आधार एवं साधन है और ध्वनि आधेय एवं साध्य। जिस प्रकार लावण्य ने के लिए अंगना के अंगों की, अथवा प्रकाश के लिए दीपशिखा की अपेक्षा रहती है, उसी प्रकार ध्वनि के लिए शब्दार्थ (वाचक शब्द और वाच्य अर्थ) की अपेक्षा रहती है ‌।
संक्षेप में कहें तो वाच्यार्थ से भिन्न अर्थ ‘व्यंग्यार्थ ‘ अथवा ‘ध्वनि ‘ कहलाता है, और इसी व्यंग्यार्थ (ध्वनि) को आनन्दवर्धन ने और उनके अनुकरण में मम्मट और जगन्नाथ ने काव्य की आत्मा माना है।

MHD 05 Solved Assignment 2021

आनन्दवर्धन द्वारा ध्वनि जैसे मानसिक व्यापार और व्यापक काव्यातत्व की स्थापना का सुपरिणाम यह हुआ कि एक ओर अलंकार , रीति जैसे बाहा काव्यांगो का शताब्दियों से प्रचलित अनावश्यक महत्व समाप्त हो गया, और दूसरी ओर चमत्कारपूर्ण मुक्तक काव्य भी, जो रस के क्षेत्र में प्रवेश नहीं पा सकते थे, जब ध्वनि काव्य के विशाल क्षेत्र में प्रवेश पा गए। ध्वनि आंतरिक भी है और व्यापक तत्व भी ।

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