Morgenthau’s Theory of International Politics hindi

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 Morgenthau’s Theory of International Politics hindi

 

Morgenthau’s का जन्म जर्मनी में हुआ था। वह हिटलर की नात्सी हुकूमत के मनमाने शासन और क्रूरता को बर्दाश्त नहीं कर पाया। वह एक शरणार्थी के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका भाग गया। उन्होंने अमेरिकियों को राष्ट्रीय-हित के बारे में सिखाया और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के Realism school की ‘स्थापना’ की। उन्होंने राजनीति को सत्ता का संघर्ष बताया। उस समय कानूनवाद और नैतिकवाद में तल्लीन ज्यादातर अमरिकी Morgenthau’s के राष्ट्रहित पर जोर देने की बात पसंद नहीं करते थे जिससे उन्हें पुरानी और अशुभ सता की राजनीति की गंध आती थी, लेकिन Morgenthau के लिए अंतरराष्ट्रीय संबंधों में केवल राष्ट्रीय-हित ही महत्वपूर्ण था।

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अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक के अध्ययन के दो प्रतिद्वंद्वी दृष्टिकोण हैं – राजनीतिक यथार्थवाद (Political realism) तथा राजनीतिक आदर्शवाद (Political Idealism)। इनमें राजनीतिक यथार्थवाद, जिसे यथार्थवादी सिद्धांत भी कहा जा सकता है, 18वीं तथा 19वीं शताब्दी में प्रचलित रहा तथा second world war के बाद पुनर्जीवित हुआ। यह सिद्धांत अनुभव और तर्क पर आधारित है। इसके अनुसार, तथ्यों और घटनाओं के वास्तविक स्वरूप के अध्ययन के पश्चात् तर्कसंगत conclusion निकाले जाते हैं। इसलिए इसको राजनीतिक यथार्थवाद सिद्धांत कहा जाता है।

इस सिद्धांत के प्रमुख प्रतिपादक माॅर्गेन्थो (Hans Morgenthau) है। यद्यपि अन्य विचारकों ने भी यथार्थवाद का प्रतिपादन किया है लेकिन माॅर्गेन्थो को यथार्थवाद को एक सिद्धांत के रूप में विकसित करने का श्रेय प्राप्त है। कुछ thinkers ‘यथार्थवाद’ और ‘ माॅर्गेन्थोवाद ‘ को एक – दूसरे का पर्यायवाची मानते हैं।
Morgenthau ने यथार्थवाद का प्रतिपादन अपनी पुस्तक ‘पाॅलिटिक्स अमंग नेशन्स’ में किया।

Morgenthau के अनुसार, “यह सिद्धांत मानव प्रकृति को उसी रूप में देखता है जैसी कि वह ऐतिहासिक घटनाओं को उसी रूप में लेता है जिस रूप में वे घटित हुई हैं। इसलिए इस Theory को यथार्थवाद का नाम दिया गया।

Morgenthau के अनुसार, शक्ति के संदर्भ में राष्ट्रीय हित की अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति को समझने की कुन्जी है। (master key) अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति की इकाइयाँ राज्य होते हैं। राष्ट्रीय हितों के लिए इन राज्यों में संघर्ष होता है तथा ये शक्ति के द्वारा अपने हितों की पूर्ति करते हैं। यहाँ महत्वपूर्ण तत्व शक्ति होता है। अन्तरराष्ट्रीय राजनीति चाहे दूरगामी उद्देश्य कुछ भी हो तात्कालिक अभिलाषा सदैव Power रहता है।

” अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति राज्यों के मध्य शक्ति के लिए किया गया संघर्ष है। ” (International Politics is the struggle for power among the nation) राष्ट्रीय हितों को पूरा करने के लिए शक्ति के प्रयोग का समर्थन होने के कारण इसे यथार्थवादी सिद्धांत कहते हैं। Morgenthau के अतिरिक्त ई. एच. कार, क्विन्सी राइट, काफमैन, लासबैल, ईस्टन आदि लेखकों ने यथार्थवाद के इस सिद्धांत को स्वीकार किया है लेकिन इसे International Politics के आधार के रूप में प्रतिपादित करने का श्रेय माॅर्गेन्थो को ही है।

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माॅर्गेन्थो के यथार्थवाद के छ: सिद्धांत
Six Principles of Morgenthau’s Realist Theory

(1) अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के मानव प्रकृति पर आधारित वस्तुगत नियम (Political realism believe that politics is governed by objective laws that have their roots in human nature.) – Morgenthau कहता है कि Politics वस्तुगत नियमों से संचालित होती है और इन नियमों का मूल मानव प्रकृति में होता है। इन नियमों को समझे बिना Political method के समाज का सुधार नहीं किया जा सकता। इन नियमों का हम छोड़ नहीं सकते क्योंकि ये सभी जगह और स्थायी होते हैं। मानव प्रकृति और मनोविज्ञान पर आधारित इस सिद्धांत से ही हम सही और गलत में अंतर कर सकते हैं तथा कल्पना के स्थान पर सचाई को समझ सकते हैं। मानव प्रकृति स्थायी है इसलिए इस पर आधारित नियम भी स्थायी होते हैं। इन्हीं के आधार पर International Politics को समझना चाहिए। हमारा प्रयत्न तथ्यों को मालूम करना तथा बुद्धि के आधार पर उनका स्पष्टीकरण होना चाहिए। विदेश नीति की प्रकृति का अनुमान राजनीतिक कामों तथा उनके प्रभावों का जाँच करके ही किया जा सकता है।

(2) शक्ति के संदर्भ में राष्ट्रीय हितों की व्याख्या (Concept of interest defined in terms of Power) – यथार्थवाद राष्ट्रीय हितों की व्याख्या शक्ति के संदर्भ में ही करता है। किसी State के अन्तर्राष्ट्रीय व्यवहार का आधार और प्रेरक उसके विशुद्ध National interest होते हैं जिनका वह शक्ति द्वारा प्रसार करता है। सब राजनीतिज्ञ शक्ति प्राप्त करके तथा शक्ति का प्रयोग करके अपने राष्ट्रीय हितों को पूरा करने में लगे रहते हैं। राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा ही विदेश नीति का आधार होती है। Morgenthau के अनुसार, “विदेश नीति का मूल उद्देश्य राजनीतिक लाभों की पाने के अलावा और कुछ नहीं है।”

Yatharthwad इस बात की चिन्ता नहीं करता कि नैतिकता क्या कहती है। यह प्रेरक तथा सैद्धांतिक प्राथमिकता आदि के भ्रम – जाल में नहीं फँसता है। हमें अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति को समझने के लिए राजनीतिज्ञों के कामों को नहीं देखने चाहिए, क्योंकि इन पर तो नैतिकता और सच्चाई का चादर चढ़ा दिया जाता है, बल्कि हमें राजनीतिज्ञों की इन्हें व्यवहार में परिणत करने की क्षमता देखनी चाहिए। Morgenthau’s  कहता है, “राजनीति सिद्धांत को बुद्धि, इच्छा तथा कार्य की राजनीतिक योग्यता की विवेचना करनी चाहिए।
अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिज्ञ का उद्देश्य राजनीतिक सफलता प्राप्त करना होता है। इसीलिए हमें अन्य किसी बात पर ध्यान न देकर National interest की पूर्ति करनी चाहिए जो शक्ति से की जा सकती है।

(3) राष्ट्रीय हितों पर परिस्थितियों का प्रभाव (Impact of circumstances on national interest) – यथार्थवाद स्वीकार करता है कि अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक का सार राष्ट्रीय हित है। ये राष्ट्रीय हित वहीं तक मान्य होते हैं जहाँ तक Power द्वारा पूरे किये जा सकते सकें। इनके सम्बन्ध में कोई स्थायी तथा निश्चित दृष्टिकोण नहीं अपनाया जा सकता है। ये राष्ट्रीय हित सदैव से राजनीतिक का सार रहे हैं Morgenthau मानता है कि पारिस्थितिया राष्ट्रीय हितों को प्रभावित करती हैं। उसकी मान्यता है कि “इतिहास के किसी भी युग में राजनीतिक क्रियाओं को प्रभावित करने वाले हित उन Political और social परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं जिनसे विदेश नीति का निर्माण होता है।
इस तरह हित स्थिर नहीं होते और ये परिस्थितियों के अनुसार बदलते हैं। इसलिए बदलती परिस्थितियों में ही राजनीतिज्ञों को विदेश नीति का निर्धारण शक्ति को ध्यान में रखते हुये करना चाहिए।

(4) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत राज्य पर लागू नहीं होते (Universal ethical theory does not apply to the state)- यथार्थवाद स्वीकार करता है कि नैतिकता के सार्वभौमिक सिद्धांत राज्यों पर ज्यों के त्यों लागू नहीं किये जा सकते हैं बल्कि उन्हें time और place के अनुसार बदलना पड़ता है। राज्यों पर नैतिकता का वह मापदंड लागू नहीं होता जो व्यक्तियों पर लागू होता है। राजनीति का महत्वपूर्ण गुण दूरदर्शिता और चालाकी ही है। Morgenthau’s मानता है कि राज्यों पर लागू नैतिकता देश, काल और परिस्थितियों के अनुसार बदल जाती है। यहाँ नैतिकता का जो भी use होता है वह अमूर्त सिद्धांत के आधार पर न होकर लक्ष्यों की प्राप्ति की दृष्टि से होता है। यथार्थवाद राजनीतिक बुद्धि को सर्वोच्च गुण मानता है और Result के आधार पर कार्यों की जांच करता है।

(5) राज्य आकांक्षाओं तथा विश्व के सामान्य नैतिक नियमों में पृथकता- राजनीतिक यथार्थवाद राज्य की नैतिक आकांक्षाओं तथा विश्व में प्रचलित नैतिक नियमों के बीच कोई सम्बन्ध स्वीकार नहीं करता। यह सिद्धांत समस्त राष्ट्रों को International Politics के रंगमंच का ऐसा कलाकार मानता है जो अपने अपने राष्ट्रीय हितों की पूर्ति में संलग्न रहते हैं। राज्य शक्ति के आधार पर national interest की पूर्ति में लगे रहते हैं। इन्हीं के आधार पर राज्यों के कार्यों की विवेचना की जा सकती है। विश्व के सामान्य नैतिक नियम राज्यों पर लागू नहीं हो सकते।

(6) राजनीतिक क्षेत्र पृथक स्वायत्तता रखता है -(Political realism maintain the autonomy of political sphere) – Morgenthau’s  राजनीतिक क्षेत्र की पृथक स्वायत्तता में आस्था रखता है। जिस प्रकार धन के आधार पर Economics, नीति के आधार पर नीतिशास्त्र और कानून के आधार पर विधिशास्त्र पृथक होता है उसी प्रकार राजनीतिक क्षेत्र भी पृथक होता है। राष्ट्रीय हित, संघर्ष और शक्ति के आधार पर international Politics का राजनीतिक क्षेत्र पृथक किया जा सकता है। यद्यपि इसके क्षेत्र में गैर राजनीतिक विचारों का भी एक स्थान होता है लेकिन उन्हें गौण समझा जाता है और राजनीतिक मानदंडों को ही प्रधानता दी जाती है। इसलिए यथार्थवाद International Politics के प्रति कानून और नैतिक दृष्टिकोण अपनाने के विरूद्ध है क्योंकि इससे राजनीतिक क्षेत्र की स्वायत्तता नष्ट हो जाने का भय है

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