MPSE 003 Solved Assignment 2020

MPSE 003 Solved Assignment 2020

MPSE 003 Solved Assignment 2020 

MPSE 003 पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन
(प्लेटो से मार्क्स तक)

MPSE 003 Western Political Science Thought
(From Plato to Marx)

Solved Assignment
30 April  2020 / 30 September 2020 

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Title – MPSE 003 पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन 

(प्लेटो से मार्क्स तक)

MPSE 003 Western Political Science Thought
(From Plato to Marx)

University – Ignou

Assignment Types – PDF, SOFT COPY /Handwritten on order

Course – Master in Political Science (mps) 

Medium / Language – HINDI MEDIUM / ENGLISH MEDIUM BOTH AVAILABLE

Session – JULY 2019, JANUARY 2020

Subjects code – MPSE003 

Assignment Submission Date – July 2019 session के लिए – 30 April 2020, January 2020 session के लिए – 30 September 2020.

MPSE

MPSE 003 Solved Assignment 2019 – 2020 in hindi medium

Q. 1 पश्चिमी राजनीतिक विचारधारा की प्रमुख विषयवस्तु पर चर्चा कीजिए। पश्चिमी राजनीतिक विचारधारा का महत्व क्या है?

उत्तर –

भूमिका – राजनीतिक चिंतन वहाँ प्रारंभ होता है जहाँ वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था को बदलकर वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था ला पाने की संभावना के प्रति जागरूकता होती है। कृषि के आविष्कार के साथ जब से व्यवस्थित जीवन प्रारंभ हुआ तभी से धीरे – धीरे राजनीतिक संगठनों के विभिन्न स्वरूप भी प्रारंभ हुए। प्रधानता : यह स्वरूप राजतंत्र का था किंतु प्राचीन यूनानी सभ्यता में अनेक प्रकार के राजनीतिक स्वरूप देखने को मिलते हैं जो अरस्तू द्वारा 158 संविधानों के अध्ययन और विभिन्न प्रकार की राजनीति प्रणालियों के विस्तृत विवरण में परिलक्षित होते हैं। बहुत अधिक भिन्नता होने तथा उस पर चलते वाद – विवाद के कारण पश्चिमी राजनीतिक चिंतन यूनानियों से प्रारंभ होकर आज तक चल रहा है।

राजनीतिक चिंतन निम्नलिखित पांच बातों से संबंधित हैं :
(1) विद्यमान व्यवस्था से बिल्कुल अलग हटने और नई शुरुआत करने के लिए वर्तमान नीति को प्रभावित करने, बदलने और संशोधित करने के लिए नए विचार, मान्यताओं और प्रस्तावों का प्रतिपादन करना। पाश्चात्य चिंतन की पूरी शास्त्रीय परंपरा उपर्युक्त प्रस्तावों के लिए पर्याप्त विविधता उपलब्ध कराती है।

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(2) राजनीतिक सिद्धांत, राज्य, शक्ति का विभाजन, कानूनी ढाँचा, प्रतिनिधित्व के विभिन्न प्रकार तथा अन्य सामाजिक विद्वानों से संबद्ध आदि विषयों से संबंधित सिद्धांतों जैसे राजनीतिक संरचनाओं और संस्थाओं से संबंध रखते हैं।

(3) राजनीतिक दर्शन, प्रामाणिकता की खोज में यह पता लगाने के लिए कि एक बड़े ढाँचे के रूप में उपलब्ध की तुलना में क्या होना चाहिए।

(4) राजनीतिक चिंतन, राजनीतिक विज्ञान विषय का मूल भाग है जो इसे मूल संकल्पनाएँ और साधन उपलब्ध कराता है तथा जिसकी सहायता से इस शाखा के अन्य उप – क्षेत्र स्वाभाविक रूप से जुड़े हुए हैं।

(5) पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन, भारतीय या चीनी राजनीतिक चिंतन आदि जैसी विभिन्न सभ्यताओं के साथ प्रारंभ और विकसित हो रहे विभिन्न प्रकार के राजनीतिक सिद्धांतों का तुलनात्मक अध्ययन।

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पश्चिमी राजनीतिक चिंतन राजनीतिक संस्थाएँ और राजनीतिक प्रक्रियाएँ

इसमें हम तीन बिंदुओं को देखते हैं – (1) पहला भाग हैं – राज्य क्या है, कैसे बने, कैसा होना चाहिए। पश्चिमी राजनीतिक चिंतन, व्यापक रूप से, राजनीतिक संस्थाओं और उनसे संबंधित प्रक्रियाओं को देखने का प्रयत्न करता है। पश्चिम राजनीतिक चिंतन का जब हम अध्ययन करते हैं तो पाते हैं कि सभी विद्वानों चाहे हम बात करे प्लेटो, अरस्तु, हाॅब्स, लाॅक और रूसो की तो सभी ने राज्य से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देने का ही प्रयास किया। जैसे कि प्लेटो – इस बात में अधिक रूचि रखते थे कि राज्य कैसा होना चाहिए।
अरस्तु – अरस्तु ने अपना सारा ध्यान सर्वोत्तम व्यावहारिक राज्य पर बल दिया।

अनुबंधवादी – हाॅब्स, लाॅक और रूसो इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तत्पर थे कि राज्य कैसे बने और व्यक्तियों को नियमों का पालन क्यों करना चाहिए।

(2) दूसरा मुख्य भाग है – राज्य स्थापित हो जाने के बाद वह किस प्रकार से शासन करता है – पश्चिमी राजनीतिक चिंतन ने प्रारंभ से ही राजनीतिक प्रक्रियाओं में रूचि रखते हुए यह जानने के लिए अपना प्रभुत्व जमाए रखा कि राजनीतिक शक्ति का प्रयोग क्यों और कैसे किया जाता है। वास्तव में राजनीतिक चिंतन राजनीतिक संस्थाओं से संबंधित होते हैं किन्तु ये राजनीतिक संस्थाओं की कार्य – पद्धति से भी संबंधित होते हैं। राजनीतिक दार्शनिक मुख्य रूप से इससे संबंधित नहीं है कि राज्य क्या है और क्या करता है बल्कि वह इससे संबंधित हैं कि एक बार राज्य को सत्ता दे दिए जाने पर वह उसका किस प्रकार उपयोग करता है।

(3) तीसरा भाग – कानून कैसा होना चाहिए।
राजनीतिक चिंतन में तीसरा भाग यह बताता है कि आखिर कानून कैसा होना चाहिए। कानून के प्रकार के बारे में यह कहा गया कि कानून अवैयक्तिक रूप से लागू किया जाए ना कि किसी विशेष व्यक्ति को ध्यान में रखकर, कानून भ्रष्ट न हो और न्यायोचित नियमों के अधीन काम करे इस प्रकार होना चाहिए।

पश्चिमी राजनीतिक चिंतन, राजनीतिक आदर्शवाद और राजनीतिक यथार्थवाद

संपूर्ण पाश्चात्य चिंतन जिन दो प्रमुख धाराओं के साथ चलाता है, वे हैं

(1) राजनीतिक आदर्शवाद या राजनीतिक दर्शन, प्रतिनिधित्व – प्लेटो। प्लेटो को राजनीतिक दर्शन का जनक ठीक ही कहा जा सकता है।

(2) राजनीतिक यथार्थवाद या राजनीति विज्ञान,प्रतिनिधित्व – अरस्तू। अरस्तू को राजनीतिक विज्ञान का जनक कहा जाता है।

दर्शन और विज्ञान ने पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन को अपने प्रभुत्व में रखा है। पाश्चात्य जगत के इतिहास ने लगभग 19वीं सदी के पहले पाँच दशकों तक दर्शन विज्ञान से ऊपर रहा। किन्तु उसके बाद विज्ञान ने अन्य सामाजिक विज्ञानों में हुई व्यापक प्रगति और उसके अनुरूप राजनीतिक विषयों को संगत बनाने की उत्सुकता ने राजनीतिक दार्शनिकों का (विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रारंभिक वर्षों और 1950 तथा 1960 के दशकों में) ध्यान आकर्षित किया।

उसके बाद एक प्रामाणिक राजनीतिक सिद्धांत और अनुभव – सिद्ध सिद्धांतों, परंपरावादियों और व्यवहारवादियों के बीच वाद – विवाद का युग आया कि राजनीतिक सिद्धांत जीवित हैं या मत हो गए हैं। इन विचार – विमर्शों की दर्शन और विज्ञान, आदर्शवाद और यथार्थवाद के बीच खींचातानी के अतिरिक्त कोई विशेषता नहीं थी। इन सबसे केवल पाश्चात्य परंपराओं में परिवर्तन और निरंतरता ही प्रमाणित हुई। बर्लिन ने “गाउल्ड एण्ड थर्सटाॅय (Gould and Thurstoy) में ” समकालीन राजनीतिक चिंतन “(Contemporary Political Thought) नामक लेख में लिखा है कि ” नव मार्क्सवाद, नव टाॅमवाद (Neo Thomism), राष्ट्रवाद, इतिहासवाद, अस्तित्ववाद आवश्यकता – विरोधी उदारतावाद ओर समाजवाद, अनुभव – सिद्ध रूप में प्राकृतिक अधिकार और प्राकृतिक नियमों को प्रस्तुत करना… एक महत्वपूर्ण परंपरा की मृत्यु का सूचक न होकर उसके ने और अकल्पनीय विकासों का घोतक है। समस्त राजनीतिक चिंतन में इसी पर विचार हुआ है कि “क्या होना चाहिए” और “क्या है” तथा निरंतर इन्ही दोनों के बीच चिंतन चलता रहता है।

MPSE 003 Solved Assignment 2020 hindi medium
पश्चिमी राजनीतिक चिंतन का महत्व

पश्चिमी राजनीतिक चिंतन का व्यावहारिक महत्व है और वास्तविकता से पश्चिमी राजनीतिक चिंतन के सम्यक ज्ञान का संबंध रहा है। अच्छे जीवन, अच्छे इंसान तथा अच्छे राज्य की खोज – पड़ताल का यह उदेश्य सबसे पुराना तथा अच्छे राज्य की खोज – पड़ताल का यह उदेश्य सबसे पुराना और चिरस्थायी है। इसे अरस्तु से लेकर आज तक के रचनाकारों ने चिरस्थायी है। इसे अरस्तु से लेकर आज तक के रचनाकारों ने अपनी रचना का स्थायी आधार बनाया है। इस खोज – पड़ताल में उन उद्देश्यों की प्राप्ति के साधनों तथा इनके मार्ग में आने वाली बाधाओं का अध्ययन भी निहित है। इसलिए यह संस्थाओं, नीतियों एवं कानूनों का अध्ययन भी करता है, जो इन संस्थाओं तथा नीतियों का निर्माण करते हैं, इन्हें प्रभावित करते हैं, इन्हें बदलते हैं तथा इन्हें न्याय संगत या अन्यायपूर्ण बनाते हैं। इसलिए इनके अध्ययन का पर्याप्त महत्व है।

पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन का संबंध उन समस्या से है, जो कुछ वृहत हितों यथा समाज का नवनिर्माण, शांति, लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता इत्यादि के इर्द – गिर्द केंद्रित रहता है, यथा – मैकियावेली के राजनीतिक चिंतन में शक्तिशाली राष्ट्र राज्य की धारणा एक ऐसे वृहत हित का उदाहरण है। मैकियावेली की सारी रचनाएँ इसी हित पर केंद्रित है। इसी तरह थामस हाॅब्स का प्रमुख हित व्यवस्था तथा सभ्यता के लिए इसके महत्व को स्पष्ट करना था।

रूसो की रचनाएँ स्वतंत्रता और समानता पर केंद्रित हैं और जे. एस. मिल की रचनाएँ लोकतंत्र और स्वतंत्रता के हित को अभिव्यक्त करती हैं। मार्क्स की रचनाओं में इतिहास की प्रगति एवं वर्ग – संघर्ष के हित प्रधान रहे हैं। इस प्रकार पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन के प्रत्येक विचारक ने अपनी – अपनी दृष्टि से विभिन्न प्रकार की समस्याओं एवं इनके समाधानों के लिए एक दृष्टि प्रदान की, जिसमें राजनीति को एक नई दिशा मिली और उसकी निरंतरता बनी हुई है एवं इसकी उपयोगिता का लाभ उठाया जा सकता है।
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निष्कर्ष – पश्चिमी राजनीतिक चिंतन के अध्ययन से हम राजनीतिक चिंतन के क्रमिक विकास को समझ सकते हैं। इसमें विभिन्न राजनीतिक विचारकों के विचारों का विश्लेषण है। इसके द्वारा हम राजनीति के साथ राज्य, राज्य के विभिन्न रूप, राज्य के आधारभूत तत्वों एवं शासन के सिद्धांत, स्वतंत्रता, समानता, प्रभुसत्ता, नागरिकों के अधिकार व कर्तव्यों का अध्ययन एवं विवेचन कर सकते हैं।

इस प्रकार राजनीतिक चिंतन मनुष्य का एक राजनीतिक प्राणी के रूप में अध्ययन है। इतिहास राजनीतिक चिंतन के लिए एक प्रयोगशाला की भांति परीक्षण – स्थल है, जहाँ विभिन्न राजनीतिक विचारों की विशेषताएँ, प्रवृत्सियां आदि जाँचें – परखे जाते हैं। विधि – विषियक ज्ञान के सर्वांगीण विकास का विश्लेषण इसमें सहज समाहित हो जाता है। यह राज्य के संचालन व क्रियात्मकता का दिग्दर्शन करती है। अच्छा क्या है और बुरा क्या है – में अंतर बताती हैं। वर्तमान, अतीत से उत्पन्न होती है, इसलिए अतीत के राजनीतिक सिद्धांतों का ज्ञान प्राप्त कर हम वर्तमान को अच्छी तरह समझ सकते हैं। अतः यह नैतिक ज्ञान के लिए आवश्यक है।

 

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