Neo Redical Approaches

Neo Redical Approaches in International Relations 

 

 Neo – Redical Approaches जिसे हिन्दी में हम नव – विप्लववादी उपागम के नाम से जानते हैं। नव विप्लववादी उपागम अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन का एक अन्य उपागम हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंध के अध्ययन के बहुत सारे उपागमों का प्रयोग किया जाता है जैसे – यथार्थवादी उपागम, उदारवादी उपागम, नव उदारवादी उपागम, मार्क्सवादी उपागम, नारीवादी उपागम, पर्यावरणीय उपागम। उन्ही उपागमों में से एक उपागम नव – विप्लववादी हैं। नव विप्लववादी एक विकल्प के तौर पर प्रयोग किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन का इसे एक वैकल्पिक उपागम कहा जा सकता है। नव विप्लववादी उपागम मार्क्सवादी उपागम और संरचनात्मक उपागम (Functionalism) का एक विकल्प हैं। Neo Redical Approaches मुख्य रूप से लैटिन अमेरिकी देशों का अध्ययन है हम यह भी कह सकते हैं कि Neo Redical Approaches का केन्द्र बिन्दु लैटिन अमेरिकी देश हैं। Neo Redical Approaches को एक ऐसा अध्ययन कहा जा सकता है जिस ने यह जानने का प्रयास किया कि लैटिन अमेरिकी देशों और अन्य तीसरी दुनिया के देशों कि विकास की गति इतनी कम क्यों हैं। लैटिन अमेरिकी आर्थिक आयोग ने अपने अध्ययन में पाया कि उन्होंने जो सहायता विकसित देशों से ली है या जो विकास कार्य अमेरिका जैसे पूँजीवादी देश द्वारा तीसरी दुनिया के देशों के किया गया है वह दरअसल उन के विकास का नहीं बल्कि उन के विनाश का कारण बना हैं। अध्ययन में यह पाया गया कि विकसित देशों ने मदद के नाम पर उन का बहुत ज्यादा शोषण किया है।

👉 Morgenthau’s Theory of International Politics 

नव विप्लववादी उपागम तीन सिद्धांतों का मिला हुआ रूप हैं या हम यह कह सकते हैं कि नव विप्लववादी उपागम को तीन अन्य नामों से भी जाना जाता है – अल्पविकास का सिद्धांत, केन्द्र – परिधि का सिद्धांत और निर्भरता सिद्धांत।

इस PDF में आप को Neo Redical Approaches और अल्पविकास का सिद्धांत (Under-development Theory) के नोट्स मिल जाएगे।

👉 Download PDF Notes  नव – विप्लववादी उपागम (Neo – Redical Approaches)

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